मैं और मेरे अह्सास
तन्हाई
पेश जिस को ज़िन्दगी के सब उजाले कर दिए l
उस ने ख़ामोशी से औरों के हवाले कर दिए ll
मुस्कुराते हुए चले देखे बिना पीछे सखी l
खूबसूरत गुल मिला हमको किनारे कर दिए ll
कोई शक सूबा न रह जाये तो सब कह डाला है l
बेतुकी छोटी सी बातों के खुलासे कर दिए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह