अहसास अपने हैं
माना हाथ और ताल साथ नहीं देते,
पर जो मन में चल रहे, वो विचार अपने हैं।
माना हमें अभी शब्द लिखने नहीं आते,
पर जो दिल में दबे हैं, वो अहसास अपने हैं।
पिंजरा छोटा है तो क्या हुआ,
इसे छूने वाली वो उड़ान अपनी है।
कितना अजीब है ना...
जब सवाल और जवाब दोनों साथ खड़े हैं,
पर समझ नहीं आता कि क्या गलत, क्या सही है।
कलम शायद थोड़ी कच्ची है अभी,
पर पन्ने पर उतरी ये हर बात अपनी है।
शब्द पराए हो सकते हैं दुनिया के लिए,
पर इन खयालों की पूरी कायनात अपनी है।