कभी मैंने खुद के बारे में नहीं लिखा,
नहीं लिखा उन समाज की सच्चाइयों पर,
नहीं लिखा कभी उस माँ की सूनी पड़ी गोद पर,
नहीं लिखा गरीबी में पल रहे उन बच्चों की हँसी पर,
नहीं लिखा देश के बदलते उन हालातों पर,
मैंने सिर्फ लिखा तुम्हें, तुम्हारे दिए हुए प्रेम के बारे में,
लिखा कि तुम्हारी आँखें इस जहाँ की सबसे हसीन नजरों में से एक हैं,
लिखा तुम्हारी उस खिलखिलाती हँसी पर, जिसे देखकर हम यूँ ही मुस्कुरा उठते हैं।
मैंने सिर्फ लिखा तुम्हें, चाहा तुम्हें,
और जिया भी सिर्फ तुम्हें।
शायद अब तुम समझ पाओ,
मेरे ज़हन और दिल के हर कोने में
तुम्हारे लिए कितनी मोहब्बत है।