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Vandna Sharma

Vandna Sharma

@drvandnasharma8596
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गीत: कहाँ गए वो पेड़*  
*रचनाकार: डॉ वंदना शर्मा*

कहाँ गए वो पेड़, वो बगिया,  
कहाँ गए वो फूल और कलियाँ,  
मेरा सुकून कहीं खो गया,  
मेरा पर्यावरण कहीं खो गया।

कैसा शहर है ये,  
जिधर भी देखूँ नज़र दौड़ाऊँ,  
इमारतें ऊँची-ऊँची, तंग गलियाँ,  
हर जगह भीड़, धुआँ-धुआँ।

कहाँ गया वो खुला नीला आसमां,  
वो चिड़िया अब नहीं आती,  
वो बरसात अब नहीं आती,  
प्रकृति जो सजाए हरी-भरी धरती।

असली सुकून वही है -  
वो नदियाँ, वो बाग़,  
वो चिड़िया, वो कलियाँ।

मत करो वीरान धरती को पेड़ों से,  
एक पौधा लगाओ जड़ो जड़ो से।  
सुनो ज़रा पक्षी भी करते हैं बातें,  
नदियाँ गुनगुनाती चलें लहलहाते।

क्या पाया इस भीड़ ने?  
सुकून खोकर उगायी इमारतें,  
फिर सुकून ढूँढने पहाड़ों पे जाते।

*आओ सजाएँ अपनी धरती,*  
*जीवन बचाएगी यह प्रकृति।*  
*आने वाली पीढ़ी को उपहार ये देना,*  
*यही है सबसे सुंदर अनमोल कृति।*

*डॉ वंदना शर्मा*  
पांडव नगर new delhi 
*3/6/25*

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*मैं वंदना हूँ*
_एक औरत, एक एहसास_

मैं वंदना हूँ,
सिर्फ नाम नहीं, एक प्रार्थना हूँ
घर के हर कोने में बसती,
रिश्तों की अनकही भावना हूँ

सुबह चूल्हे से शुरू होती हूँ,
रात किताबों में खत्म होती हूँ
दिन भर सबकी फिक्र करती हूँ,
आधी रात को खुद को लिखती हूँ

मैं माँ हूँ तो ममता बाँटती हूँ,
बहन हूँ तो हक़ से डाँटती हूँ
बेटी हूँ तो फर्ज निभाती हूँ,
पत्नी हूँ तो घर सजाती हूँ

पर इन सबके बीच कहीं,
एक "मैं" भी छुपी बैठी है
जो कविता में साँस लेती है,
शब्दों से दुनिया बुनती है

"खाने में क्या बनेगा" से लेकर,
"मोर के पंखों" के दर्द तक
मैंने हर आँसू को स्याही बनाया,
हर मुस्कान को कागज़ पर टाँक

थकती हूँ, टूटती हूँ, फिर जुड़ती हूँ
कभी चुप, कभी दुनिया से लड़ती हूँ
पर हार मानना सीखा ही नहीं,
क्योंकि मैं वंदना हूँ -
*_वंदना मतलब अभिवादन,
और मेरा जीवन ही सबसे बड़ा अभिनंदन है__

अपनों के लिए जीती हूँ,
अपनों में ही खिलती हूँ
ना मंदिर, ना मस्जिद चाहिए,
बस अपनों की खुशी में मिलती हूँ

__तो सुनो दुनिया वालो,
मैं कमजोर नहीं, कोमल हूँ
मैं बोझ नहीं, आधार हूँ
मैं सवाल नहीं, जवाब हूँ
मैं वंदना हूँ - और मुझे खुद पर नाज़ है_

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*स्कूल का टाइमटेबल*

पहला पीरियड है हिन्दी
लगी हुई जिसपर बिन्दी

दूसरा पीरियड है इतिहास
जिसमें भरी पड़ी बकवास

तीसरा पीरियड है भूगोल
जिसमें आता नम्बर गोल

चौथा पीरियड है विज्ञान
मुझको नहीं इसका कोई ज्ञान

पाँचवा पीरियड है गणित
जोड़-घटा पहाड़े अनगिनत

छठा पीरियड है अंग्रेजी
पढ़ने में ना लागे जी

सातवां पीरियड है संस्कृत
ना ढूँढो इसके तार संयुक्त

आठवां पीरियड है कला
मैं चित्रकार बनने चला

किसने बनाई ये पढ़ाई
करनी होगी उसकी बड़ाई
कहाँ से उसके दिमाग में आई
कि जरूरी है बड़ा पढ़ाई

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- Vandna Sharma

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मेरे शहर बिजनौर, तेरी यादें हमेशा खास रहेगी

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राम तुमने सिखाई मर्यादा
पर जग सीख ना पाया
राम राम तो गाया
पर जीवन में राम ना अपनाया
राधा राधा सबने गाया
पर प्रेम को त्यागा
ईर्ष्या को अपनाया

- Vandna Sharma

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बाग में मोर नाचा, सबने देखा
मोर ने अपने पैरों को देखा
एक टीस उभरी जैसे चाँद में दाग
क्यूँ नहीं किसी ने मेरा दर्द देखा
पंख मेरे अनन्य सुन्दर
पैर मेरे क्यूँ कुरूप फिर
चिढ़ाए मोरनी मुझको क्यूँ
कैसा है ये कुदरत का लेखा
सावन में जब बरसे पानी
कुदरत भी झूमे बन दीवानी
आ जाता मेरी आँख से पानी
क्यूँ रह जाता एक काश किसी कहानी में
अपूर्णता ही बने सुन्दरता सबकी कहानी में
कहे मोरनी मुझको देखो
मैं सुंदर पर सुंदर पंख नहीं है मेरे पास
अनदेखा कर अपनी कमी
पोंछ आँखों की नमी
छुओ आसमान पर ना छुटे जमीं
तेरी-मेरी नहीं सबकी यही कहानी
थोड़ी खट्टी थोड़ी मीठी जिंदगी सयानी
ईश्वर का वरदान है जिंदगानी
सुंदर गुलाब सबने देखा
संग काँटों का हमेशा ना देखा
बारिश में मोर नाचा सबने देखा
सुख दुख तो है विधि का लेखा

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*डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

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*मेरे शहर, बिजनौर*
_डॉ वंदना शर्मा_

ए मेरे शहर 'बिजनौर'
तेरे बारे में दुनिया कुछ भी कहे
पर मेरे लिए तू खास है
तेरी गलियों में मेरा बचपन बीता
वो सुनहरे दिन, वो स्कूल की यादें
तेरे संग खेलकर मैं बड़ी हुई
वक्त के तूफानों को दोनों ने झेला
दुःख के झमेलों को, खुशी के ठिठोलों को
बदलते रिश्तों को, निरन्तर परिवर्तन को
दोनों ने साथ देखा हर समय
तूने मुझे पहचान दी
एक नई उड़ान दी
जिन्दगी के कुछ खास लम्हें भी
जिए तेरी गोद में
कुछ यादें अनकही
कुछ खुशबुएँ अनछुई
कुछ अहसास पहली बार जिए
कुछ सपने तेरे साथ बुने
कुछ बरसातें बड़ी खास रही
वो पहली दुआन प्यार की
वो मीठी यादें टकरार की
तेरे संग-संग तो जाना मैंने
हर रंग जिन्दगी का पहचाना मैंने
ए मेरे शहर, मेरे हमसफर
तुझे है सलाम मेरा
मेरी यादों में अमर रहेगा नाम तेरा...

_Vandna_

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सब शून्य है शून्य में है यही दृष्टि
एक चक्र है जीवन दर्शन उसकी दृष्टि

सबसे मुश्किल सवाल
खाने में क्या बनेगा आज
- Vandna Sharma

sabse muskil सवाल खाने में क्या बनेगा आज

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