कौन होते है वो लोग जो पढ़ाई ओर जिंदगी के सारे मजे ले लेते है।
मैं परीक्षाओं के समय बिन ब्याही विधवा बन जाती हूं....
घर का माहौल बदल रहा है, मातम सा छा रहा है।
परीक्षाओं की घड़ी नजदीक आ रही है
मेरे सारे श्रृंगार मुझ से छीने जा रहे है
घर के प्रत्येक व्यक्ति को चुप रहने की हिदायत दी जा रही है
" बच्चों आवाज मत करो दीदी पढ़ रही है" यह कह कर गली मोहले में सन्नाटा किया जा रहा है
खाना पानी कमरे में ही पहुंचाया जा रहा है
मुझे पूरा महसूस करवाया जा रहा है में बिन ब्याही विधवा बन गई हू
मां की आंखों में परीक्षा की चिंता पापा के मन में परिणाम का डर खाए जा रहा है
मैने अपनाया खाली कमरा जहां से किसी सुहागिन पर मेरी परछाई भी ना पड़े।
मैं ढूंढती हु किताबों में अपना भविष्य मुझे फिर से सुहागिन होने का मौका मिले।।
✍️ अंतिमा 😊