Hindi Quote in Poem by AbhiNisha

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दूसरों के वक्त चुराने वाले
कविता




दूसरे से वक्त लेने वाले
दूसरों को वक्त देना सीखो
किसी और से उम्मीद रखने वाले
किसी और की उम्मीद पर डटकर खड़े रहना सीखो


बस शिकायत ना करो
दूसरों की शिकायते भी सुनो

बात-बात पे ना करने वाले
किसी और का ना सुना भी सीखो

किसी से प्यार चाहते हो तो प्यार दो
किसी से काम करवाना चाहते हो तो
उसके काम भी तुम कर दो


जिस चीजों की जरूरत तुम्हें है
सेम उसी चीज की जरूरत किसी और को भी है


यह समझो
अगर तुम्हारा कोई ख्याल रखना है तो
समझो कोई खुद से ज्यादा
अगर तुम्हें कोई इंपॉर्टेंट समझता है तो



समझो जो तुम्हारी हर बातों पर आहें हैं भरता है तो
समझो कोई अगर तुम्हारे फैसले का हमेशा समान करता है तो


समझो कि बदले में वह भी
तुमसे यही सब चाहता है
समझो कि उनका वक्त भी तुम्हारे तरह ही इंपॉर्टेंट हो सकता है


समझो कोई
खुद को खाली कर दिया तुम्हारे लिए तो
समझो तुम्हारे साथ होने से ज्यादा इंपोर्टेंट है
उनके लिए तुम्हारा साथ देना

दूसरों से उम्मीद रखने वालें
समझो कि तुमसे भी कोई उम्मीद रखता है





यूं हमेशा मुह ना मोर
गौर से जरा तुम उनकी भी बातें सुनो
जिसे जहां भर के किस्से तुम सुनाते रहते हो




उसका भी दिल है
जिसके अंदर उसकी ही टूटन पड़ी हुई है
उसे भी तुम जरा सुनो


जिसे तुम नरम दिल समझते हो
उसे अनदेखा करके पत्थर तो ना बनाओ



उनके घुटन को भी जरा महसूस करो
जिसके सर पर तुम अपने गम की सारे बुझ तोड़ते हो




जरा पास जोओ उनके
और सामने बैठो
और पूछ लो जरा उनके दिल की हाल



और अगर बताने लगे तो
2 मिनट बैठकर शांति से सुन लो
अगर ना बताएं भी तो
2 मिनट खामोश बैठ बिना कुछ कहे
साथ उनके साइद इतना ही काफी हो
उनके लिए



दूसरों के वक्त चुराने वाले
जरा अपना भी वक्त को खोर देखो
किसी और को अपनी कीमती वक्त देकर देखो


सबको जरूरत है प्यार की देखभाल की अपनेपन की
सबको जरूरत है तुम्हारा भी इंसानीपन की

Hindi Poem by AbhiNisha : 112021082
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गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर
गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर

सुबह की पहली किरण जैसे ही खेतों पर पड़ती, पूरा गांव सुनहरी रोशनी से जगमगा उठता। पक्षियों की मधुर चहचहाहट, मंदिर की घंटियों की आवाज़ और ठंडी हवा मन को एक अलग ही शांति देती थी।

शहर में रहने वाली अनन्या कई साल बाद अपने दादा-दादी के गांव आई थी। शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और मोबाइल की दुनिया में वह खुद को थका हुआ महसूस करती थी। गांव पहुंचते ही उसने देखा—हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर घर का दरवाज़ा खुला था और हर इंसान एक-दूसरे का हाल पूछ रहा था।

एक सुबह दादाजी उसे खेतों में ले गए। हरी-भरी फसलें हवा के साथ झूम रही थीं। किसान मेहनत कर रहे थे, लेकिन उनके चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

अनन्या ने पूछा, "दादाजी, यहां लोगों के पास शहर जैसी सुविधाएं तो नहीं हैं, फिर भी ये इतने खुश कैसे हैं?"

दादाजी मुस्कुराए और बोले, "बेटी, खुशी बड़ी-बड़ी इमारतों में नहीं, बल्कि संतोष, अपनापन और प्रकृति के साथ जीने में होती है।"

उस दिन अनन्या ने बच्चों के साथ मिट्टी में खेला, पेड़ों की छांव में बैठकर कहानियां सुनीं, तालाब किनारे सूर्यास्त देखा और रात को खुले आसमान में अनगिनत तारों को निहारा।

जब वापस शहर लौटने का समय आया, तो उसके दिल में एक नई सोच जन्म ले चुकी थी। उसने समझ लिया कि जीवन का असली सुख केवल पैसा कमाने में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए पलों और प्रकृति के करीब रहने में है।

उसने तय किया कि चाहे वह शहर में रहे, लेकिन गांव की सादगी, प्रेम और शांति को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखेगी।

सीख:
"सच्ची खुशी वहीं मिलती है, जहां मन को शांति, रिश्तों में अपनापन और प्रकृति का साथ मिलता है। गांव की सादगी ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।" 🌿🌾

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