बचाओ बचाओ ' जिंदा आग मे झुलसी ' भाग भाग कर अपने आप को बचाने को भागती है।
एक बहू एक बेटी, एक मां, क्या से क्या हो गया। मामला सुधरने की जगह ' बिगड़ गया। सारा परिवार तस्त व्यस्त हो गया। क्या समस्या का समाधान हो गया।
जो बात दो परिवारो के बीच थी। दुनिया भर की दिलचस्व न्यूज बन गयी है। लेकिन उस में से सब से ज्यादा पति पत्नि बच्चो का बिगड़ा ' बय खाता बिखर गया। जिन्दगी के पन्ने इधर उधर अफवाहो में उड़ गये।
जातिवाद में बदलाव आया। सुविधाओं मे बदलाव आया " विज्ञान कहाँ से कहाँ पहुँच गया। समाज मे सिर्फ समझौता आया। उसका भुगतान बनती है। बेटी ' बजह कौन हैं सामाजिक प्रथा आग में जल गयी वो दिख गया जो वो चारदीवारी में सहती है। वो संस्कार ' आवाज उठाती है बदसलुकी ।
कामयाब महिला कलम उठाती है ।मैडम ' जो महिला बेलन घूमाती है। पैर की जूती ' इस में भूमिका किसकी परिवार के माहौल की ' मजदूर आदमी रोज खायेगा , रोज कमायेगा शाम होते ही एक पऊआ चढ़ाऐग।
औरत के खर्चे, बच्चो की पढ़ाई फालतू का खर्च समझेगा।
जिंदा जल गयी, आत्महत्या के बाद अंतिम संस्कर में भी जला दी . ' कभी जहर खा कर ' फंदा लगा कर ' कभी मुकदमा चला कर ' कभी बर्षो महीने तक पीहर छोड़ देना ' क्या मानिसक प्रताड़ित किया जाता है ।
पल-पल जलती है। पल- पल जी कर मरती है। पत्नि से मार पीट बाहर का गुस्सा निकालना
परिवारिक मामला है। कह कर छोड़ दिया जाता है।
जब परिवार को परेशान करना है । कोई भी बहाना बना सकता है। बस झुलती इस में सिर्फ बेटी रिश्तो के चाहे कोई सा नाम दे हो।