फायकू - मकर संक्रांति
4-3-2 वर्ण (अंतिम पंक्ति - तुम्हारे लिए अनिवार्य)
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मकर संक्रांति का पर्व
है अति विशेष
तुम्हारे लिए।
सनातन संस्कृति का स्वर
सूर्य हुए उत्तरायण
तुम्हारे लिए।
स्नान, ध्यान, दान, मान,
खिचड़ी पर्व महान,
तुम्हारे लिए।
बदलती प्रकृति की आभा,
बसंत की दस्तक
तुम्हारे लिए।
रंग बिरंगे पतंगों से
सज गया आकाश
तुम्हारे लिए।
तिल गुड़ की महक
प्रकृति की मुस्कान
तुम्हारे लिए
माघ पूर्णिमा की तिथि
मकर संक्रांति विशेष
तुम्हारे लिए।
सात्विक संदेश लेकर आया
मकर संक्रांति पर्व
तुम्हारे लिए।
प्रकृति की सुंदरतम छटा
मुस्कान बिखेरती है
तुम्हारे लिए।
जप, तप, दान किया
गंगा स्नान भी
तुम्हारे लिए।
जीवन दर्शन समझ लिया,
अब हमने भी,
तुम्हारे लिए।
सुधीर श्रीवास्तव