विमुक्ति........
"ये जो पुष्प जो तुम्हे इतने प्रिय है, इन्हें तोड़ना क्यु है
उन भूली बिसरी यादों को फिर से सोचना क्यु हैं
खिल जाने दो वो पुष्प जो तुम्हे बहार दे सकता हैं और
भूल जाओ तुम उन यादों को जो तुम्हारे कदम
उत्कर्ष की ओर बढ़ने से रोक सकता हैं....."