काश, काश की वो दिन वापस आपाते,
काश, काश की हम बचपन की उन प्यारे से पलों को एक बार फिर जी पाते।

भाई-भाई मे दौलत को लेकर होते झगड़े, बचपन की उन छोटे-छोटे,प्यारे-प्यारे से नोक-झोंक मे बदल पाते।
काश, काश की वो दिन वापस आपाते,
काश,काश की हम बचपन की उन पलों को एक बार फिर जी पाते।

बुढ़े माँ-बाप को खुद से दूर कर रहे उनके बच्चे,एक बार फिर उनके गोद मे सो पाते,
काश,काश की वो दिन वापस आपाते,
काश,काश की हम बचपन के उन पलों को एक बार फिर जी पाते।

Hindi Shayri by Anushruti priya : 179
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