आ गया एक बार फिर दशहरा ....
इस दशहरे बुराई पे अच्छाई की जीत नहीं बल्कि
अच्छाई पे बुराई की जीत होगी । सौ बुरे लोग निकलेंगे एक रावण को जलाने उनको जलाकर बहुत ही संतुष्ट होगे ।जबकि असली रावण उनके मन में है जो वो देखना नहीं चाहते ।और अच्छाई कही कोने मे बैठ के वो सब चीज़ों के लिए तरसेगी जो वो अपने परिवार को नहीं दिला पाई । और इस उम्मीद मे वो अपना जीवन बिता देगी ।
दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं...