वफ़ा कर नहीं तो मुझसे दग़ा कर,
प्यार कर नहीं तो मुझे इनकार कर।
ये बीच राह का सफ़र अब गवारा नहीं,
डूबने दे या कश्ती को पार कर।
खामोशियों से मेरा दिल न जला,
बोल कुछ भी, चाहे तकरार कर।
यूँ आदतन न देख मेरी तरफ़,
या तो अपना ले, या बेज़ार कर।
कब तलक यूँ तड़पेगा दिल-ए-नादाँ,
फ़ैसला अब कोई आर या पार कर।