मां
आपके युग में आपने राक्षसों का संहार किया और सबको डर से मुक्त करके आपने हम इंसानों पे बहुत बड़ा उपकार किया मां...लेकिन
हम इस कलयुग में इंसानों के अंदर बसे हुए राक्षसों को कैसे पहचाने ??कैसे पहचान पाए कि हमारे आस पास किसके अंदर इंसानियत है और किसके अंदर शैतान है यहाँ तो हर तरफ बस सबके चेहरे पे एक मुखौटा है जिसे पहचानना बहुत मुश्किल है मां ....आप ही कोई रास्ता दिखाओ मा जो सही है उसके साथ गलत ना हो ओर जो गलत हो उसका हिसाब आप करे क्योंकि आप जब हिसाब करोगी तो किसी की भी हिम्मत नहीं होगी दुबारा गलती करने की ....