स्त्री कभी स्वतंत्र नहीं होती और यदि वह स्वतंत्रता चाहती है तो उसके समक्ष होते हैं दो विकल्प, या तो विद्रोह करे और अपनों को खो दे, समाज में नीच बन जाए या फिर कर ले समझौता इच्छाओ से और जीवन भर घुट कर जियें, वो कुछ भी चुने दोनों ही विकल्पों में उसकी हार ही होती है...!!!