अवसाद में डूबा व्यक्ति आँसू नहीं चाहता,ना ही चाहता है सांत्वना का इत्र वह ख़ुद से भी कोई बहस नहीं करता बल्कि स्वयं भाग जाता है,ख़ुद के सामीप्य से भी वह सिर्फ़ चाहता है अपने मन के लिए एक ऊँची मचान जहाँ से कुछ देर बैठकर देख सके खुद को एक गहरी त्रासदी में डूबते हुए और कर सके अफसोस...!