स्वयं का दुःख किसी को भी नहीं बताना चाहिए,सिर्फ ख़ुशियाँ बाँटनी चाहिए दुःख व्यक्तिगत होता है,जो बहुत खाश लोग होंगे वे भी एक सीमा तक ही सुन सकते हैं,इसके बाद वे आप पर दुःखी आत्मा का ठप्पा लगाकर चले जायेंगे,भले वे दैनिक रूप से अपनी नकारात्मकता आपके अंदर फेंककर जाते रहें हो...!