सुकून
मुझे खामोश रहना सुकून देता है
लिख कर कुछ कहना सुकून देता है
असमान का तारा शायद न बन पाऊं
आँगन का दीपक बनना सुकून देता है
शोर में दम घुटता है मेरा
एकान्त में बैठना सुकून देता है
ऊंचाई का दीवाना नहीं शायद
ज़मीन से जुड़ना सुकून देता है
पहले था बड़े लम्हो का इंतजार
अब छोटे पल में जीना सुकून देता है
पहले में भी जीता था बोझ उठाकर
अब हल्का रहना सुकून देता है
कारवाँ बनाना मेरी आदत नहीं
कुछ उलझे हुए को सुलझाना सुकून देता है
अब खोता नहीं खुद को दुनिया के मेले में
खुद में लौटकर आना सुकून देता है
बड़ी बड़ी बाते करने का आदि नहीं हु में
कुछ शब्दों में सब कुछ कहना सुकून देता है