आसमान के इन परिंदों से सीख तू उड़ने की तराह,
ज़िंदगी खुली है तेरे आगे तू रख उसे खोलने की चाह,
यूँ मायूस बैठकर मत हो तू उदास,
तू वो तलाश जिसमें हो तेरी खुशी के राज़,
कोई अपना नहीं यहां है सब खुद्दार,
ये सोच बंदकर तू खुद बन अपना पहरेदार,
लकीरों के हवाले मत छोड़ किस्मत की आस,
पकड़ कलम और लिख तू खुद अपनी किस्मत को खास,
दुनिया को मत ढूँढ यहाँ सब सिर्फ दुनियादार,
तू खिलखिलाना सिख फिर देख कैसा निखरेगा तेरा किरदार,
तू ये मत सोच की अब क्या होगा कल,
आगे बढ़ना सिख किसको पता कोनसा हो आख़िरी पल?
ना कर इंतेज़ार कोई पकड़ चलेगा तेरा हाथ,
कोई नहीं यहां तेरे सिवाय तेरे साथ,
तेरे सिवाय तेरे साथ।
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-Bhumitaba Rana!