ऐसा शायद सबके साथ होता होगा है कि एक वक़्त में जहाँ किसी इंसान का होना बहुत महत्व रखता है लेकिन फिर उस इंसान की बातें,आदतों से दिल इतना दुःखी हो जाता है कि फिर धीरे धीरे उसके होने ना होने से फ़र्क पड़ना कम होने लगता है
ना कोई सवाल पूछने कों दिल करता है,ना नाराज़गी जताने कों