तेरे साथ की कहानी लिख दूँ तो ग़ज़ल बन जाए
*तुम और मैं - एक खूबसूरत एहसास*
तुम मेरे पास हो तो लगता है,
जैसे वक्त ठहर गया है कहीं,
तुम्हारी हँसी में मेरा सुकून है,
तुम्हारी आँखों में मेरा घर वहीं।
तुम चाय सी हो, सुकून सी हो,
सुबह की पहली धूप सी हो,
तुम मिल जाओ तो लगता है,
जैसे दुआ कुबूल सी हो।
मैं लफ्ज़ नहीं, एहसास हूँ तेरा,
तू ख्वाब नहीं, मेरे पास है मेरा,
हाथ तेरा हाथ में हो तो,
लगता है पूरी कायनात है मेरी।
न सोना चाहिए, न चाँदी चाहिए,
बस तेरा साथ चाहिए,
तेरे साथ बूढ़ा होना है मुझे,
बस इतनी सी ख्वाहिश चाहिए।
तू है तो मैं हूँ,
मैं हूँ तो हम हैं,
और हम हैं तो,
ये जिंदगी मुकम्मल है।