कुछ रिश्ते इसलिए खत्म नहीं होते कि प्यार मर जाता है, बल्कि इसलिए कि सच्चाई सामने आ जाती है। Acceptance आसान नहीं होता, क्योंकि इसका मतलब होता है यह मान लेना कि जो हम चाहते थे, जो हमने सोचा था, जो हमने कल्पना की थी—वह नहीं हुआ। यह मान लेना दिल को भी चोट पहुँचाता है और ego को भी। लेकिन जिस दिन इंसान स्वीकार करना सीख लेता है, उसी दिन वह खुद से लड़ना बंद कर देता है।
Letting go को अक्सर हार समझ लिया जाता है। लोगों को लगता है कि छोड़ देना मतलब कमजोर होना, पीछे हट जाना। जबकि सच यह है कि छोड़ देना कई बार सबसे शांत और सबसे मज़बूत फैसला होता है। जब आप किसी रिश्ते को रोज़ अपने आत्मसम्मान की कीमत पर पकड़कर रखते हैं, तब आप टूटते हैं। लेकिन जब आप छोड़ते हैं, तो दर्द खत्म नहीं होता—वह बदल जाता है। वह दर्द हल्का हो जाता है, संभालने लायक हो जाता है। It stops controlling you.
Acceptance का मतलब यह नहीं कि आपको सब कुछ समझ आ गया है। इसका मतलब यह है कि आप अब हर सवाल का जवाब ढूँढ़ने की ज़िद नहीं करते। आप यह मान लेते हैं कि कुछ चीज़ें इसलिए नहीं हुईं क्योंकि उन्हें होना ही नहीं था। यह realization शुरुआत में खालीपन लाती है, लेकिन उसी खालीपन में शांति जन्म लेती है।
जब आप स्वीकार करना सीखते हैं, तब आप blame से बाहर आते हैं। आप सामने वाले को villain बनाना छोड़ देते हैं और खुद को victim ...