तुम हवा की तरह मेरी रूह से टकरा के निकल गए,
अहसास जब तक होता तुम दूर निकल गए।
हम हाथ बढ़ा कर भी तुम्हें थाम ना सके,
तुम बनके एक ख्वाब मेरी आँखों से फिसल गए।
ना आहट हुई कोई, ना कोई शोर हुआ,
एक लम्हे में तुम रिश्तों की दिशा बदल गए।
पीछे छूट गयी बस खामोशी की एक धूप,
और तुम बनके बादल किसी और आँगन में बरस गए।