सितंबर का यह आखिरी दिन भी जैसे चुपचाप अपने साथ एक पूरा मौसम समेटकर विदा होने को है।सुबह अब पहले जैसी नहीं लगती।हवा में एक अलग सी ठहराव भरी ठंडक महसूस होने लगी है, सूरज की पहली किरणों में भी गर्मी कुछ नरम सी लगती है। दिन चढ़ता है तो धूप अपना तेज दिखाती है, मगर उसके भीतर अब मौसम बदलने का संकेत साफ महसूस होने लगा है। दोपहर की गर्मी के बाद शाम आते आते हवा का मिजाज बदल जाता है, जैसे दिन भर की थकान के बाद प्रकृति भी धीरे से सुकून की साँस ले रही हो।और फिर रात...रात में एक अलग ही एहसास उतरने लगा है। हवा में हल्की ठंडक, आसमान में बदलता रंग, शांत होती गलियाँ और दूर दूर तक पसरा सन्नाटा।सब मिलकर जैसे आने वाले मौसम की आहट दे रहे हैं। अब वह तपिश धीरे धीरे पीछे छूट रही है और ठंडी सुबहों तथा सुकून भरी रातों का इंतजार शुरू हो गया है।सितंबर के जाते जाते सिर्फ मौसम नहीं बदलता, आसपास का माहौल भी बदलने लगता है। बाजारों में रौनक धीरे धीरे बढ़ने लगती है, घरों में पर्व त्योहारों की तैयारियों की बातें होने लगती हैं, नए कपड़ों, मिठाइयों और सजावट की कल्पनाएँ मन में जगह बनाने लगती हैं। ऐसा लगता है जैसे आने वाले पर्वों की खुशबू अभी से हवा में घुलने लगी हो। अब अक्टूबर दरवाजे पर खड़ा है,उसके साथ उत्सवों की आहट है,घरों की रौनक है,दीपों की कल्पना है, परिवार के साथ बैठने की गर्माहट है और बचपन की वे सारी यादें हैं जो हर साल इस मौसम के साथ फिर लौट आती हैं।शायद मौसम के बदलने की सबसे खूबसूरत बात यही है वह केवल बाहर की प्रकृति नहीं बदलता मन के भीतर भी कुछ पुराना छोड़कर कुछ नया आने की जगह बना देता है।सितंबर की यह आखिरी शाम इसलिए सिर्फ महीने का अंत नहीं है,यह उस मौसम की विदाई है, जिसने हमें बहुत कुछ महसूस कराया,और उस खूबसूरत समय की दस्तक है जिसका इंतजार दिल हर साल बेसब्री से करता है।