बहुत रोया हूँ तेरे लिए, अब और रोना नहीं है,
जो छोड़ गया मुझे, उसके लिए खोना नहीं है।
मैंने सीख लिया है आँसुओं को छुपाना,
अब इस दर्द को सबको दिखाना नहीं है।
तूने तो खेल समझा था मेरे जज़्बातों को,
अब मुझे भी ये खेल दोहराना नहीं है।
मैं टूटा ज़रूर हूँ, पर बिखरा नहीं हूँ,
अब खुद को फिर से मिटाना नहीं है।