मैंने चाहा था तुझे टूटकर, तूने चाहत को तमाशा बना दिया,
मैंने मांगी थी वफ़ा, तूने जुदाई को किस्सा बना दिया।
रातों को जागकर जो ख़्वाब बुने थे तेरे साथ,
तूने एक पल में उन ख़्वाबों को बिखरा दिया।
लोग पूछते हैं अब मुस्कुराना क्यों छोड़ दिया,
मैं कहता हूँ किसी ने मुस्कुराने की वजह ही छीन ली।
अब न शिकवा है, न शिकायत है तुझसे,
बस दुआ है तू जहाँ रहे, आबाद रहे।