ध्यान का अर्थ है:
तुम्हारा तादात्म्य छूट जाए-उन सब चीजों से
जो तुम्हारे आसपास घटती हैं दुख आया, तुम दुखी हो गए-ध्यान चूक गया। सुख आया,तुम सुखी हो गए-ध्यान चुक गया। दुख आया, सुख आया, आने दो जाने दो-तुम दर्पण रहो। तुम देखो भर। उसके साथ एक मत हो जाओ, इतनी सी ही कला है ध्यान की!