****यदि मिल जाए ज़िन्दगी में सब कुछ, हर दुआ कबूल हो जाए,
तो फिर ज़िन्दगी जीने का मज़ा कैसा?
यदि मिल जाए हर ख़्वाहिश का फल पल भर में,
तो फिर इंतज़ार की मिठास कैसी?
मैं चाहूँ अगर हर सपने का मुकम्मल होना,
तो ज़िन्दगी में अंधेरों से लड़कर उजाले तक पहुँचने का मज़ा कैसा?****
**** ---- by rakshita