मैं हूँ या नहीं
तुम हो या नहीं
कैसे पता लगेगा?
चलो कुछ प्यार कर लें
या कुछ सच बो दें,
उस स्थान पर फिर मिल लें
जहाँ हम मिला करते थे।
कुछ शब्द तुम कहो
कुछ शब्द मैं कहूँ,
इस मौन के बीच
मैं तुम्हें ढूंढूं।
चलो ईश्वर को ले चलें दूर
आज के युद्धों के बीच
नहीं हाँकना है उन्हें रथ।
मैं हूँ या नहीं
ईश्वर तुम हो या नहीं
कैसे पता लगेगा?
*** महेश रौतेला