बहुत मन करता है किसी से बात करने का पर दिमाग थका हुआ है जो चाहता नहीं पुनः ठगे जाना,यार दोस्त या कोई खास ऐसा कुछ जीवन में अब बचा नहीं, ऐसा नहीं कि थे नहीं बल्कि मैं ही उनसे दूर होता गया, समय होने पर भी बात नहीं की,अकेले ही रहता हूं अक्सर कहीं भी रहूं तो एकांत खोज लेता हूं...!!!