माँ की महिमा — माता-पिता से बढ़कर कोई धन नहीं
माँ का प्यार किस्मत वालों को मिलता है,
माँ के आँचल में सुकून मिलता है।
उसकी ममता की छाँव में,
हर दुख अपना रास्ता बदलता है।
माँ केवल एक शब्द नहीं,
माँ तो पूरा संसार है।
उसके कदमों के नीचे जैसे,
खुशियों का भंडार है।
बच्चा जब इस दुनिया में आता है,
माँ एक नई दुनिया बसाती है।
अपने बच्चे की छोटी-सी मुस्कान पर,
वह अपनी सारी खुशियाँ लुटाती है।
बच्चा रोता है तो माँ बेचैन होती है,
बच्चा हँसता है तो माँ मुस्काती है।
बच्चा कुछ कहे या कुछ न कहे,
माँ उसके मन की बात समझ जाती है।
बच्चे की खामोशी को भी,
माँ अक्सर पढ़ लेती है।
आँखों में छिपे आँसू देखकर,
बिना पूछे सब समझ लेती है।
माँ अपने दुखों को छिपाकर,
चेहरे पर मुस्कान सजाती है।
खुद कितनी भी थकी हो लेकिन,
बच्चों से पहले खाना खिलाती है।
कभी खुद भूखी रह जाती है,
लेकिन बच्चों का पेट भरती है।
अपने हिस्से की खुशी भी माँ,
बच्चों के नाम कर देती है।
उसके पास चाहे कम हो,
फिर भी देने को बहुत कुछ होता है।
माँ के छोटे-से आँचल में,
बच्चों के लिए पूरा संसार होता है।
माँ की भाषा शब्दों से बड़ी है,
माँ की ममता का कोई मोल नहीं।
दुनिया में बहुत रिश्ते मिलेंगे,
पर माँ जैसा कोई अनमोल नहीं।
बच्चा जब पहला कदम बढ़ाता है,
माँ का चेहरा खिल जाता है।
बच्चा गिरकर जब रोता है,
माँ दौड़कर उसे उठाती है।
बच्चे का पहला शब्द सुनकर,
माँ का दिल खुशी से भर जाता है।
बच्चा बड़ा होकर दूर भी जाए,
माँ का आशीर्वाद साथ जाता है।
समय नदी की तरह बहता है,
बचपन धीरे-धीरे गुजर जाता है।
माँ की गोद में खेलने वाला बच्चा,
एक दिन बड़ा हो जाता है।
फिर उसके सपने बढ़ते हैं,
नई राहें उसे बुलाती हैं।
वह अपने भविष्य के पीछे चलता है,
और दूरियाँ बढ़ती जाती हैं।
लेकिन गाँव के उस छोटे से घर में,
माँ फिर भी राह निहारती है।
दरवाजे पर आती हर आहट में,
अपने बच्चे की आवाज़ पुकारती है।
माँ को हमेशा धन नहीं चाहिए,
न उसे महंगे उपहार चाहिए।
कभी उसके पास बैठकर देखो,
उसे बस अपने बच्चे का प्यार चाहिए।
एक छोटी-सी फोन की घंटी,
माँ के चेहरे पर खुशी ला देती है।
बच्चे की आवाज़ सुनते ही,
उसकी सारी थकान मिटा देती है।
हम दुनिया की दौड़ में अक्सर,
अपनों से दूर निकल जाते हैं।
खुशियों की तलाश में भटकते-भटकते,
घर की खुशियाँ भूल जाते हैं।
बड़ा घर बन जाता है हमारा,
सामान भी बहुत आ जाता है।
लेकिन माता-पिता का साथ न हो,
तो घर भी खाली-खाली लगता है।
दुनिया की दौलत कितनी भी हो,
माता-पिता का प्यार नहीं खरीदा जा सकता।
उनके आशीर्वाद जैसा धन,
किसी बाजार में नहीं मिलता।
पिता भी कम त्याग नहीं करता,
बस वह अपना दर्द कम दिखाता है।
परिवार की जरूरतों के लिए,
वह दिन-रात मेहनत करता जाता है।
पिता की आँखों में सपने होते हैं,
बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के।
वह अपने अरमानों को रोककर,
सपने देखता है अपने बच्चों के।
माँ ममता की छाँव देती है,
पिता हिम्मत की दीवार बनता है।
दोनों मिलकर अपने बच्चों के लिए,
जीवन का आधार बनता है।
जब बच्चा जीवन में गिरता है,
माता-पिता उसे उठाते हैं।
जब दुनिया हिम्मत तोड़ देती है,
वे फिर से हौसला बढ़ाते हैं।
बच्चों की छोटी-सी सफलता पर,
माँ-बाप सबसे ज्यादा खुश होते हैं।
बच्चे की गलती कितनी भी बड़ी हो,
फिर भी उसे अपना ही कहते हैं।
लेकिन उम्र बढ़ने के साथ-साथ,
कभी बच्चे बहुत व्यस्त हो जाते हैं।
माँ-बाप घर में इंतजार करते हैं,
और बच्चे दूर चले जाते हैं।
माँ दरवाजे पर बैठी रहती है,
शायद बच्चा आज घर आएगा।
रास्ते की हर आहट पर,
उसका दिल कहता है—वह आएगा।
माँ कभी शिकायत नहीं करती,
न अपने दर्द का हिसाब बताती है।
बस बच्चे की एक झलक पाने को,
अपनी आँखें राह में लगाती है।
उसे याद रहता है बचपन,
जब बच्चा उसका हाथ पकड़ता था।
डर लगता था जब उसे अकेले,
तो माँ के पास आकर खड़ा होता था।
माँ को याद रहती है वह हँसी,
वह पहला कदम, वह पहली बात।
बच्चा चाहे सब भूल जाए,
माँ को याद रहती हर बात।
इसलिए माँ की कदर करो,
जब तक माँ तुम्हारे पास है।
कल का कोई भरोसा नहीं,
आज ही उसके लिए समय खास है।
पिता का सम्मान भी करना,
उसकी मेहनत को समझना।
जिसने अपने सपने रोक दिए,
उसके सपनों को भी पढ़ना।
माता-पिता को समय देना,
सिर्फ धन देना काफी नहीं।
कभी उनके पास बैठ जाना,
इससे बड़ी कोई खुशी नहीं।
उनकी बातें ध्यान से सुनना,
चाहे वही कहानी फिर सुनाएँ।
उनके बीते जीवन के किस्से,
कभी-कभी उन्हें फिर से हँसाएँ।
सबसे बड़ी पूजा क्या होगी?
माता-पिता की सेवा करो।
उनके जीवन की इस संध्या में,
प्रेम का दीपक जला करो।
मंदिर में जाकर पूजा करना,
अपनी जगह बहुत अच्छा है।
लेकिन माता-पिता के चरणों में,
सेवा का भाव सबसे सच्चा है।
सच्चा धर्म वही है जिसमें,
दूसरों के दुख को समझा जाए।
और माता-पिता के जीवन में,
प्रेम और सम्मान बरसाया जाए।
कल कहकर मत टालो बातें,
आज ही दिल की बात कहो।
माँ को गले लगाकर एक बार,
अपने मन की बात कहो।
पिता के पास बैठकर बोलो,
“आपने मेरे लिए बहुत किया।”
इन छोटे-छोटे शब्दों से देखो,
उनका मन कितना खुश हुआ।
छोटी-छोटी बातों पर अक्सर,
घर में नाराजगी हो जाती है।
लेकिन प्यार से बात करने पर,
हर दूरी कम हो जाती है।
माता-पिता भी इंसान हैं,
उनसे भी गलतियाँ होती हैं।
बच्चों से भी भूलें होती हैं,
फिर भी रिश्तों में राह होती है।
माफ करना सीखो अपनों को,
रिश्ते इससे मजबूत होते हैं।
जहाँ प्यार और समझदारी हो,
वहीं घर सच में सुंदर होते हैं।
घर बड़ा होने से क्या होगा,
अगर उसमें अपनापन नहीं?
महंगे सामान होने से क्या होगा,
अगर माँ की हँसी ही नहीं?
माँ की मुस्कान में शांति है,
पिता की बातों में हिम्मत है।
माता-पिता के साथ होने से,
साधारण जीवन में भी बरकत है।
एक दिन ऐसा भी आएगा,
जब हम उनकी आवाज़ तरसेंगे।
उनके पास बैठने की चाह में,
बीते हुए पल याद करेंगे।
तब शायद हम सोचेंगे,
काश थोड़ा और समय दिया होता।
काश माँ के पास बैठकर,
उसकी बातें सुनी होतीं।
काश पिता की मेहनत को,
हमने समय रहते समझा होता।
काश उनके साथ बिताया हर पल,
दिल में संभालकर रखा होता।
इसलिए पछतावे से पहले,
माता-पिता की कदर करो।
जब तक वे साथ खड़े हैं,
उनके जीवन में खुशियाँ भरो।
उनका आशीर्वाद साथ हो तो,
मुश्किल राह भी आसान लगती है।
उनकी दुआओं की छाया में,
जिंदगी कुछ खास लगती है।
माँ का प्यार नदी जैसा है,
जो कभी रुकता नहीं।
पिता का साया पेड़ जैसा है,
जो धूप में झुकता नहीं।
वे खुद कम में रह लेते हैं,
लेकिन बच्चों को आगे बढ़ाते हैं।
अपनी जवानी और मेहनत देकर,
बच्चों के सपने सजाते हैं।
समय के साथ चेहरे बदलेंगे,
बालों में सफेदी आएगी।
कदम कभी धीमे हो जाएँगे,
पर ममता कहाँ कम हो पाएगी?
जब माता-पिता बूढ़े होंगे,
तब हमारी बारी आएगी।
जिस हाथ ने हमें संभाला था,
उसी हाथ को हमारी जरूरत होगी।
जिसने हमें चलना सिखाया,
उसे सहारा देना होगा।
जिसने हमें दुनिया दिखाई,
उसका संसार बनना होगा।
दुनिया हमें नाम दे सकती है,
दौलत और शोहरत दे सकती है।
लेकिन अच्छे बेटे-बेटी होने की,
खुशी सबसे अलग होती है।
माँ केवल एक रिश्ता नहीं,
माँ त्याग और दुआ है।
माँ के होने से ही तो,
जीवन में सच्ची रोशनी हुआ है।
पिता केवल एक नाम नहीं,
पिता संघर्ष और सहारा है।
उसकी मेहनत के कारण ही,
बच्चों का जीवन प्यारा है।
माता-पिता के दिल को समझो,
उनके त्याग को याद करो।
जिन हाथों ने तुम्हें पाला है,
उन हाथों का सम्मान करो।
कभी इतने व्यस्त मत होना,
कि अपनों के लिए समय न रहे।
कभी इतना अहंकार मत रखना,
कि माँ-बाप के आगे सिर न झुके।
सबसे बड़ी प्रार्थना दया है,
सबसे बड़ी पूजा सेवा है।
सबसे बड़ी दौलत परिवार है,
सबसे बड़ी खुशी माता-पिता हैं।
माँ का प्यार किस्मत वालों को,
जीवन में मिलता है।
जिसके सिर पर माँ का हाथ हो,
उसका मन भी खिलता है।
माँ की महिमा कौन बताए,
शब्द जहाँ पर कम पड़ जाएँ।
उसकी ममता लिखते-लिखते,
सात समंदर भी कम पड़ जाएँ।
क्या धरती और क्या यह अंबर,
माँ की महिमा सात समंदर।
युग आते हैं, युग जाते हैं,
माँ की गाथा दोहराते हैं।
समय बदलता रहता है लेकिन,
माँ का प्यार नहीं बदलता।
दुनिया चाहे दूर चली जाए,
माँ का आशीर्वाद नहीं बदलता।
माँ के चरणों में जो सम्मान,
वह कहीं और नहीं मिलता।
माता-पिता की सच्ची सेवा से,
बड़ा कोई धर्म नहीं मिलता।
इसलिए जब तक साथ हैं अपने,
उनके चेहरे पर मुस्कान रखो।
माँ के आँचल की छाया में,
अपने दिल में सम्मान रखो।
पिता की मेहनत याद रखो,
माँ का त्याग कभी मत भूलो।
जीवन में चाहे कितना आगे बढ़ो,
अपने माता-पिता से कभी दूर मत हो।
दुनिया बदल जाए चाहे,
रास्ते कितने भी बदल जाएँ।
माँ-बाप का प्यार हमारे भीतर,
जीवन भर रोशनी बनकर जलता जाए।
माँ का प्यार अनमोल है,
पिता का साया अनमोल है।
उनकी दुआएँ जीवन की,
सबसे सुंदर पूँजी हैं।
इस दुनिया में बहुत कुछ मिलेगा,
लेकिन माता-पिता दोबारा नहीं मिलेंगे।
इसलिए उनके रहते उनकी कदर करो,
यही जीवन के सबसे बड़े सबक मिलेंगे।
माँ की गोद से शुरू हुई जिंदगी,
माँ की दुआओं से सँवरती है।
माता-पिता की सेवा करने वाला,
जिंदगी में सच्ची खुशी पाता है।
माँ का प्यार किस्मत वालों को मिलता है,
इसे दिल से पहचानो।
माता-पिता की सेवा करो,
और उनके प्रेम को अपना मानो।
यही सबसे बड़ी पूजा है,
यही सबसे बड़ा धर्म है।
माता-पिता के चरणों में,
सच्चे जीवन का मर्म है।
माँ का सम्मान करो,
पिता का सम्मान करो।
जब तक दोनों साथ हैं,
तब तक अपने घर का मान करो।
क्योंकि दुनिया में चाहे जितनी खुशियाँ मिल जाएँ,
माँ-बाप की जगह कोई नहीं ले सकता।
और जिसने माता-पिता का प्यार पा लिया,
उससे बड़ा किस्मत वाला कोई नहीं हो सकता