अगर सुबह हमेशा साथ होती,
तो कहाँ होता पंछियों का राग?
अगर सुबह हमेशा साथ होती,
तो कहाँ होता आग सा जलता सूरज?
अगर सुबह हमेशा साथ होती,
तो जीवन में मधुर गान कहाँ होता?
ना आती कभी जीवन में शाम,
तो बेहद हसीन नज़ारे कहाँ होते?
अगर सुबह हमेशा साथ होती,
तो पहाड़ियों का थकान भरा सुकून कैसा होता?
और कैसे बहती ये अविरल सुबह????
----- by rakshita