यहाँ रुक जाओ, ज़रा ठहरो, और खुद को थाम लो,
बहते हुए आँसुओं से थोड़ा आराम लो।
माना कि राहों का बोझ बहुत भारी है,
पर यह रात तुम्हारी आख़िरी रात नहीं है, अभी तो लड़ाई जारी है।
ज़िंदगी से उकता जाना, थककर टूट जाना,
कोई गुनाह नहीं है खुद से रूठ जाना।
पर इस अँधेरे को ही आख़िरी सच मत मान लेना,
अभी रोशनी आनी बाकी है, यह खुद से ठान लेना।
तुमने सहे हैं दर्द जितने, उतनी ही गहरी तुम्हारी पहचान है,
इस बिखरे हुए दिल में अभी भी एक पूरा आसमान है।
जब लगे कि सब कुछ ख़त्म होने को आया है,
याद रखना, नए सवेरे ने हमेशा काली रात को ही हराया है।
बस आज की रात खुद को बिखरने दो,
रो लो जी भरकर, और दर्द को बहने दो।
कल फिर उठेंगे, एक नए हौसले के साथ,
पर आज के लिए, थामे रखो खुद का हाथ।