गिरा है सिर्फ़ ख़्वाब तेरा, तू अभी हारी नहीं,
ज़िंदगी का खेल है यह, जंग कोई आख़िरी नहीं।
माना आज रास्ते में दर्द का एक मोड़ है,
पर तू रुकावटों को तोड़ दे, तुझमें वो ज़ोर है।
आँसुओं को पोंछकर तू फिर ज़रा मुस्कुरा,
अपनी छिपी हुई ताक़त से दुनिया को मिला।
जो टूट गया ख़्वाब, उसे वहीं छोड़ दे,
ज़िद से अपनी तू क़िस्मती का रुख़ मोड़ दे।
हर काली रात के बाद एक नया सवेरा आता है,
जो गिरकर संभलता है, वही इतिहास बनाता है।
उठ और बढ़ा क़दम, मंज़िल तेरा इंतज़ार करती है,
यह दुनिया भी उसी के आगे झुकती है, जो हार से नहीं डरती है।