Hindi Quote in Poem by Vishakha Pareek

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

किसको दोष दूँ मैं अपने गुनाहों का,
जब मालूम है... गुनहगार मैं खुद हूँ!
​मेरी गलती, मेरी हस्ती,
मेरी बस्ती... जो टूटी मेरी आँखों के सामने,
किसको कहूँ मेरे आँसुओं की वजह क्या है?
जब मालूम है... आँसुओं का कतरा गिराने की वजह मैं हूँ,
जब मालूम है... उस कतरे का हकदार मैं हूँ!
​आखिर किसको दोष दूँ मैं अपने गुनाहों का,
जब मालूम है... गुनहगार मैं हूँ!
​मुझे नहीं करना अपनी गलतियों का पश्चाताप,
मुझे नहीं करना अपनी गलतियों का पश्चाताप...
मुझे तो बस अपनी गलती की सज़ा भुगतनी है!
​पर किससे कहूँ कि सज़ा दे मुझे मेरी गलती की?
जब मालूम है... अपना ठेकेदार ही मैं हूँ!
​ज़मीन हक में है मेरे, मैं ज़मींदार हूँ उसकी,
ज़मीन हक में है मेरे, मैं ज़मींदार हूँ उसकी...
किससे कहूँ कि बेच दे इसको,
जब मालूम है... खरीदार ही मैं हूँ!
​किसको दोष दूँ मैं अपने गुनाहों का,
जब मालूम है... गुनहगार ही मैं हूँ!

Hindi Poem by Vishakha Pareek : 112036639
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now