कविता दिल खुश है अकेला
कवयित्री डॉ वंदना शर्मा
दिल खुश है अकेला
नहीं चाहिए कोई झमेला
जिन्हें कद्र नहीं हमारी
उनसे दूरी ही अच्छी
जो सुनना नहीं चाहते
उनके लिए चुप्पी ही अच्छी
व्यर्थ ऐसे रिश्तो के लिए
अपने शब्द, भाव देना
अपनी डायरी, कलम
ही सबसे अच्छी
ये नदिया, भी तो
बहते चुपचाप मस्त
पहाड़ भी रहते तने
रहते शांत खड़े
फूल भी देखो खिलते हैं
बिना किसी उम्मीद के
जिंदगी भले छोटी हो
जिंदगानी बड़ी जायेगी
कोई पढ़े ना पढ़े
कहानी लिखी जायेगी
बात निकली है तो
कहीं तो जरूर जायेगी
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली
vandna.reporter@gmail.com