नही चाहा कभी भुलाना ही
भूलना न भूलना बात दूसरी है
समय ने थोपे है कई बदलाव
मुझमें जहाँ चाहा नहीं बदलना
नही बदली हूँ
हो जाये कोशिशे कामयाब मेरी
कोई बात इतनी शख्त भी नहीं है
किसी की मौजूदगी इतनी गहरी नहीं है
जितनी गहराई में सोच ढली है
सतह पर है सबकुछ सतह पर मैं भी बैठी हूँ..
- Ruchi Dixit