"एक ख्याब था जो आंखों में पलता रहा
एक अनुराग था जो मौन में ढलता रहा
हमने चाहा उसे अपनी तकदीर बना ले
मगर वक्त अपनी ही रीत पर चलता रहा
मिलन की आस लिए उम्र गुजरती रही
और विरह की ऋतु ह्रदय में ठहरती रही
प्रेम था सच्चा मगर कहानी अधूरी रही
हम दोनों थे–पर हमारी राहें अलग होती रही...!"