हरतरफ देख लो तमाशा वही है
रुलाये हरकोई, पर कोई हसाता नहीं है
चिरागों की सोहबतों में रहें हैं हम
येअन्धेरा हमें सताता नहीं है
हाँ जमाना सता गया हमें इस कदर
चराग रौशन करूं जी चाहता नहीं है
पत्थरबाजों की आरजू जब हम हैं
मेरे घर का पता क्यूं उन्हें बताया नहीं है
कैसे आस्मां की ऊंचाई नापोंगें तुम
पिजरें में कैद परिन्दा कभी उड़ाया नहीं है