रात की गहराई
रात की गहराई में,
जब दुनिया सो जाती है,
तब खामोशी धीरे से
दिल की बातें सुनाती है।
चाँद भी कुछ कहता है,
तारों की झिलमिल रोशनी में,
कुछ अधूरे ख्वाब जागते हैं,
यादों की तन्हाई में।
दिन के शोर में जो छुपा था,
वो रात में सामने आता है,
आँखें बंद होते ही इंसान
खुद से मिलने लग जाता है।
कभी रात आँसू बन जाती है,
कभी उम्मीद की किरण,
कभी बीते कल की कहानी,
कभी आने वाले कल का सपना।
रात जितनी गहरी होती है,
सवेरा उतना ही करीब होता है,
शायद यही जिंदगी का सच है—
हर अँधेरे के बाद
एक नया उजाला जरूर होता है।