Hindi Quote in Poem by Sudhir Srivastava

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हास्य - मैं मरना चाहता हूँ
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कल दोपहर मैं अपनी आड़ी-तिरछी
रचनाओं में उलझा हुआ था,
कि मित्र यमराज कबाब में हड्डी सरीखे आ गए
स्वागत सत्कार जलपान की
परंपरा तो निभाना ही था, सो निभाया
फिर मैंने ही बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाया।
अब जब तू आ ही गया है, तो जान ले
जान क्या बल्कि मान ले,
यमराज ने मुझे टोका-क्या जानना मानना है?
मैंने - बिना लाग-लपेट के बताया-
कि मैं अब मरना चाहता हूँ।
यमराज एक पल के लिए ठिठका
फिर अपने रंग में आ गया
तो रोका किसने - मरना है तो मर
कल मरना है तो आज मर
आज मरना है तो अभी मर।
उसकी बात सुन मैं मुस्कराया
अरे बेवकूफ - मुझे तेरी चिंता है
तुझे बार-बार आना पड़ता है,
बेवजह समय खराब करना पड़ता है
तेरी आवभगत में में मेरा भी आर्थिक नुक़सान होता है।
इतना सुनते ही बंदा भड़क गया -
तू कहना क्या चाहता है?
अरे यार तू खामखाँ क्यों नाराज हो रहा है
अब तू आ ही गया तो तेरे साथ निकल लेता हूँ
दोनों को इसका लाभ मिल जाएगा
तुझे मेरे लिए आना नहीं पड़ेगा
और मुझे मरने के लिए फिर सोचना नहीं पड़ेगा।
मेरी बात सुन यमराज झुंझलाया-
यार! समझ नहीं आता है
कि तेरे दिमाग में खुराफात की फैक्ट्री किसने लगाया।
फिलहाल तो मैं निकलता हूँ
और तुझे मरने की अग्रिम शुभकामनाएं मुफ्त में देता हूँ,
मगर मैं तुझे अपने साथ नहीं ले जा सकता हूँ
तेरी तरह मैं निठल्ला थोड़े हूँ,
बहुत काम है मेरे जिम्मे -जिसमें तू कहीं नहीं है।
वैसे तू मरना चाहता है तो बाखुशी मर जा
मैं अपनी ओर से अग्रिम शुभकामनाएं देता हूँ,
तू कहे तो थोड़ा बहुत रोने का नाटक भी कर लेता हूँ
मगर अपने साथ बिल्कुल नहीं ले जा सकता हूँ,
अपने सुख-चैन में आग नहीं लगा सकता हूँ
तेरी कविताएं सुन-सुनकर मैं खुद नहीं मरना चाहता हूँ
इतना कहकर वो मेरी ख्वाहिश को
लात मारकर फ़ुर्र हो गया,
यार होकर भी यार को फिर निराश कर गया।

सुधीर श्रीवास्तव

Hindi Poem by Sudhir Srivastava : 112036013
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