हर एक व्यक्ति को अपने हिसाब से जीने का अधिकार है, लेकिन
जब हमारे अपने, बार बार
एक ही बात हमको समजा रहे हो,
तो वह बात सुनना, और उस हिसाब से
खुद में बदलाव लाना हमारी पहेली और सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी है, और हमारा फर्ज भी,
इसमें हमें क्रोध या सुनी अनसुनी करके, खुद को सही साबित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि आगे चलते, यही गलती हमारे लिए बहुत ही नुकशान कारक साबित हो सकती है,
और दूसरी महत्वपूण्र बात ये कि,
अभी हम अपने तरीके से जो जिंदगी जी रहे हो,
वह तरीका हमारे अपनों से छिपा हुआ नहीं होना चाहिए.
क्योंकि यह तरीका तो वक्त के गुजरते, न सिर्फ हमारे घरवालों को,
बल्कि हमारे जीवन में भी, दुःख और बेशुमार परेशानियां भर देगा.