...."अमित, लाइव रिकॉर्डिंग चालू रखना," राघव ने उत्साहित होते हुए फर्श पर पड़े एक पुरानी तांत्रिक किताब के फटे हुए पन्ने की तरफ़ हाथ बढ़ाया। लेकिन जैसे ही राघव की उंगलियों ने उस शापित पन्ने को छुआ, पूरे तहखाने का तापमान अचानक गिर गया। उनकी सांसें धुएं की तरह मुंह से बाहर आने लगीं।
तभी, उस अंधेरे तहखाने के सबसे गहरे कोने से किसी के ज़ोर-ज़ोर से सिसकने की आवाज़ आई... जैसे कोई औरत वहाँ बैठकर रो रही हो।
पढ़िये मेरे नए एपिसोड को जल्द ही, सिर्फ़ और सिर्फ़ मातृभारती पर!
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