कभी मैने सोचा था कि कल्पनाओं ने रंग ले लिया, पर फिर वह सब धूल में मिल गया, जैसे कोई रेत का महल लहरों से टकराकर बिखर गया हो, मै उन यादों से भागना चाहता हूँ, मै दीवारों से बातें करता हूँ पर वे पीछा नहीं छोड़ती, वे मेरे साथ चलती हैं, हर पल मुझे याद दिलाती हैं कि मै कितना अधूरा हूँ ।