A QUESTION TO KANHA, ON THIS JANMASHTAMI
तू आया इस दुनियाँ में, एक अंधेरी आधी रात में, फैलाने प्यार;
पर दूर ले गये थे तुझे माँ की गोद से, जमुनाजी के पार
माँ यशोधरा ने पाला तुझे बड़े प्यार से, दिया बहुत दुलार
गोप-गोपियों ने भी चुराया तुझ संग मक्खन, मस्ती की बार-बार
बडे प्रेम से उन्होंने रास रचे तुझ संग, करके सोलह शृंगार
और तेरी राधिका; उसकी प्रीत की तो कान्हा, नहीं कोई मिसाल
बन गई दिवानी वो तेरी बाँसुरी की धुन की; संग संग झूमा सारा संसार।
फिर कान्हा, हुआ क्यूँ नहीं तुम दोनों का मिलन? क्यूँ हुई प्यार की हार?
Armin Dutia Motashaw