# नीले आकाश के नीचे
**लेखक — SKP Divine Creation**
नीले आकाश की छाँव तले,
कुछ सपने आज भी पलते हैं,
हवाओं के कोमल स्पर्श से,
मन के दीपक फिर जलते हैं।
आकाश कहता है धीरे से—
“तुम सपने देखो, डरना मत,
राहों में चाहे काँटे हों,
अपने कदमों को रोकना मत।”
बादल आएँगे जीवन में,
कभी धूप भी मुस्काएगी,
हर आँधी के बाद एक दिन,
सुबह नई फिर आएगी।
पंछी जब नभ में उड़ते हैं,
सीमाएँ सारी टूटती हैं,
छोटे-से पंखों के भीतर,
बड़ी-बड़ी आशाएँ होती हैं।
मैंने बादल को चलते देखा,
जैसे कोई सपना जाता हो,
नीले नभ के विशाल पटल पर,
अपनी कहानी लिखता हो।
कभी मन भी बादल बन जाता,
आँखों में सावन भर जाता,
पर नीला आकाश सिखाता है—
हर दुख एक दिन मिट जाता है।
जब राह कठिन हो जाए सारी,
जब लगे कि मंज़िल दूर है,
तब ऊपर देखो नीले नभ को,
वहीं उम्मीद का नूर है।
अपने सपनों को पंख लगाओ,
अपने मन में विश्वास जगाओ,
गिरकर फिर से उठते रहो,
जीवन को मुस्कान बनाओ।
नीला आकाश यही कहता—
“तुम्हारी उड़ान अभी बाकी है,
जो सपना दिल में जीवित है,
उसकी पहचान अभी बाकी है।”
इसलिए मैं चलती जाऊँगी,
हर मुश्किल से लड़ती जाऊँगी,
नीले आकाश के नीचे ही,
अपने सपनों को गढ़ती जाऊँगी।
क्योंकि आकाश कभी छोटा नहीं,
सपनों की कोई सीमा नहीं,
जिस दिल में उम्मीद ज़िंदा हो,
उसकी कोई हार कभी नहीं।