प्रेम की 'मायाजाल में फंसना उतना ही आसान है~
"जैसे शिशु फंस जाता है माँ के प्रेम से बनाए गए जाल में~जब माँ कहती है मेरे पास आ जाओ मैं तुम्हें नहीं मारूंगी, लेकिन होता ठीक इसके विपरीत है!
वैसे ही प्रेम हमें बहुत स्नेह से अपनी तरफ आकर्षित कर तो लेता है लेकिन
पड़ती हमें सिर्फ मार ही है, जो दिखती शायद नहीं है... परंतु हृदय को इतना आहत करती है... शायद ही उसे शब्दों में बायां कर पाए कोई... और स्वयं को हम सिर्फ तब दुर्बल और असहाय ही महसूस कर सकते हैं 🌻