मैं और मेरे अह्सास
यादें बचपन की
यादें बचपन की जिन्दगी का ख़ज़ाना हैं l
यादों के सहारे सफ़र को सजाना हैं ll
हर उम्र की एक दास्तान होती है तो l
वो भी ज़माना था ये भी ज़माना हैं ll
अल्लडपन नटखट शरारत याद कर l
खुश रहने का अच्छा सा बहाना हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह