मेरे भीतर जो खलीपन है उसमे शायद कहीं मैं प्रेम करना ही भूल न जाऊँ, फिर भी दिल की गहराइयों में कोई छोटी सी लौ बाकी है जो कहती है कि शायद एक दिन, किसी अप्रत्याशित पल में, प्रियतमा मेरे सन्नाटे को तोड़कर आएगी, और मैं इस खालीपन में डूबा हुआ, इंतज़ार करता हूँ उस दिन का जो शायद कभी आए।