कुछ सवाल होते हैं रिश्तों में जिनके जवाब शायद हम जानते हैं.. लेकिन सामने वाले के मुहँ से सुनना थोड़ा नहीं बहुत ज्यादा बुरा लग जाता है..
हर सवाल पूछ के उसका जवाब जानने की चूल हमे खुद को ही पीड़ा देती है....
इस पीड़ा को अवॉइड कर के भ्रम में निभा सकते हो तो निभाते रहो नहीं तो रास्ते बदल लो.. रोज रोज क्यूँ मरना..
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