कभी-कभी मन की उलझनों में कुछ ऐसे शब्द मुँह से निकल जाते हैं,जिन्हें कहने का इरादा बिल्कुल नहीं होता सामने वाला शायद उन शब्दों को सुनकर आहत हो जाए,मगर सच तो यह है कि उनका दर्द कहने वाले के भीतर कहीं ज्यादा देर तक रहता है क्योंकि कुछ शब्द कह देने के बाद वापस नहीं लिए जा सकते,बस उनका अफसोस मन में रह जाता है...!